थाइरॉयड कैंसर में इस ट्रीटमेंट की होती है बहुत जरूरत

आरएमएलआई में थाइरॉयड कैंसर का इलाज करवाना अब आसान होगा। पथॉलजी डिपार्टमेंट में अगले महीने से विशेष जांच शुरू की जा रही है, जिससे थाइरॉयड कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन की पहचान की जाएगी। उसी हिसाब से मरीज को टारगेटेड थेरपी दी जाएगी। यह जानकारी शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में आरएमएलआई के पथॉलजी डिपार्टमेंट की हेड ने बताई।

उन्होंने बताया कि इस जांच से यह पुख्ता हो जाएगा कि मरीज में कैंसर कितना फैल चुका है और उसे किस ट्रीटमेंट की जरूरत है। इससे मरीजों को बिना मतलब की सर्जरी से नहीं गुजरना होगा। इस जांच का नाम B-RAF इम्यूनो हिस्टो केमिस्ट्री है।

जीन म्यूटेशन की वजह से होता है थाइरॉयड कैंसर

कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ मैसेच्यूट्स से आए पथॉलजिस्ट ने बताया कि B-RAF जीन म्यूटेशन की वजह से थाइरॉयड कैंसर होता है। इसकी जांच के लिए फाइन न्यूडल एस्पीरेशन साइटॉलजी (एफएनएसी) और बायॉप्सी के जरिए मार्कर लगाकर जीन म्यूटेशन का पता लगाया जाता है।

थाइरॉयड कैंसर नहीं है NIFT-P

उन्होंने यह भी बताया कि थाइरॉयड की वह बीमारी, जिसमें गले में गांठ होती है, वह कैंसर नहीं है। मेडिकल की भाषा में इसे NIFT-P कहा जाता है। अब तक इसका ट्रीटमेंट कैंसर की तरह ही किया जाता था। लेकिन यह सिर्फ एक ट्यूमर होता है, जिसका इलाज आम ट्यूमर की तरह ही किया जाना चाहिए। वर्तमान में कई आधुनिक टेस्ट आए हैं, जिसमें डीएनए, एनजीसी, आरटीपीसीआर जैसे टेस्ट प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज

  • गले में गिल्टी का महसूस होना
  • पानी पीने में परेशानी होना
  • थूक गटकने में गिल्टी का अपनी जगह से हिलना
  • आवाज में बदलाव होना