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तीन राजधानी विधेयक को आंध्र-प्रदेश विधानसभा में मज़ूरी

आंध्र-प्रदेश में तीन राजधानी को लेकर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा था। लेकिन अब इसे राज्य की विधानसभा ने मज़ूरी दे दी है। हालांकि विधेयक पास होते ही इसके विरुध लोग सड़को पर आ चुके है। आंध्रप्रदेश की पहले राजधानी हैदराबाद हुआ करती थी। लेकिन बाद में तेलंगाना अलग राज्य बन गया। नए विधेयक के पास होने के बाद अब अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी और कुर्नूल को न्यायिका राजधानी बनाया गया है।

विधानसभा में विधेयक पास होने के बाद इस पर जमकर विवाद हुआ। टीडीपी के 15 विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित कर दिए है। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटे आई है। जगन सरकार के इस फैसले को राज्य के मुख्य विपक्षी दल टीडीपी इसके विरुध अपना विरोध प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने जगन सरकार आरोप लगाया है कि एक समुदाय को हित में रखकर यह फैसला लिया गया है। आंध्रा की पिछली सरकार चन्द्रबाबू नायडू ने अमरावती को राजधानी बनाने का फैसला कर लिया था। और इसके लिए 32 हजार करोड़ की राशि भी मज़ूर कर दी थी। आंध्र प्रदेश के अमरावती में नायडू समुदाय की आबादी ज्यादा है तो दूसरी तरफ विजयवाड़ा-गुंटूर समुदाय की बहुलता है।

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बता दे कि वाईएस जगन  मोहन रेड्डी की सरकार ने आंध्र-प्रदेश की तीन राजधानियों के विधेयक को विधानसभा में पेश किया,और उसे मंजूरी भी मिल गई। इस विधेयक के पास होते ही अमरावती को विधायी , विशाखापत्तनम को कार्याकारी और कुर्नूल को न्यायिका राजधानी बनाया गया है। देश में इससे पहले महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की भी दो राजधानी है।

नए प्रस्ताव के अनुसार अमरावती में विधानसभा रहेगी, विशाखापत्तनम में मुख्यमंत्री कार्यायल, राजभवन और सरकारी दफ्तर होगे ,  वही कु्र्नुल में हाई कोर्ट शिफ्ट हो जाएगा। सरकार ने तीन राजधानी के पीछे तर्क दिया है कि इससे तीनों का सपूर्ण विकास होगा। और प्रदेश के हर जिलें में विकास की आंशका ज्यादा रहेगी।

 

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