ऐसे करें इलाज अगर आपके हाथ-पैर हो जाते हो सुन्न !

हमें यह हमेसा देखने और सुनने को मिलता है कि अचानक एक हाथ या पैर सुन्न पड़ जाता है। काफी देर मूवमेंट करने के बाद ही हाथ या पैर नॉर्मल होता है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो धीरे-धीरे यह परेशानी हमें रोजाना होने लगती है। हालांकि यह बीमारी कोई गंभीर बीमारी नहीं है। अगर सही वक्त पर इलाज मिलता है और मरीज तय समय पर दवाओं का सेवन करता है तो उसे इससे बहुत ही आसानी से छुटकारा मिल सकता है। वैसे इस बीमारी को कॉर्पल टर्नल सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है।

ये हैं कारण
एक ही हाथ से लगातार काम करने से हमें यह परेशानी हो सकती है। यह कारण ज्यादातर लोगों में देखने को मिलता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को लगभग तीन गुना ज्यादा इस बीमारी की संभावना रहती है। कंप्यूटर पर कार्य करने वाले, कारपेंटर, ग्रॉसरी-चेकर, मजदूर, मीट पैक करने वाले, संगीतकार, मकैनिक इसका बुरी तरह शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा मधुमेह व थायराइड की वजह से भी यह गंभीर परेशानी हो सकती है।

लक्षण
-हाथों और अंगुलियों में झुनझुनाहट या सुन्न पड़ना विशेषकर अंगूठे, बीजक व मध्य अंगलियों में।

-कलाई, हथेली और बाजुओं में दर्द।

-दिन की तुलना में रात के दौरान बहुत अधिक दर्द व सुन्न पड़ जाना। यह दर्द बहुत बुरी तरह से हो सकता है। आप अपने हाथ को आराम दिलाने के लिए इसे रगड़ या हिला सकते हैं।

-जब आप अपने हाथ या कलाई का बहुत अधिक इस्तेमाल करते हों तो अधिक दर्द हो सकता है।

-कोई भी वस्तु उठाते समय अधिक परेशानी होना।

-अंगूठे में कमजोरी महसूस करना।

उपचार
डॉक्टर्स के मुताबिक, यदि कार्पल टर्नल सिंड्रोम किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय समस्या से होता है तो डॉक्टर सबसे पहले उस दिक्कत को ही ठीक करते हैं। फिर वह कलाई को पूरी तरह आराम दिलाने को कहेगें या आप कैसे अपने हाथ का इस्तेमाल करते हों, उसे बदलने के लिए कहेगें। कलाई में स्पलिंट (आधी कमर के नीचे बांधी जाने वाली पट्टी) को भी बांध सकते हैं। स्पलिंट पहनने के बाद आप अपनी कलाई को हिला-डुला भी नहीं पाएंगे लेकिन सामान्य क्रियाएं जरूर कर सकते हैं। आप अपनी कलाई पर बर्फ रखकर उससे मालिश कर सकते है और साथ ही कुछ खिंचाव वाले व्यायाम भी इससे निजात दिलाने में आपकी मदद कर कर सकते हैं।

कार्पल टर्नल सिंड्रोम में राहत दिलाने वाले कुछ टिप्स…

-जब आप लेटे हुए हो तो अपनी बाजुओं को तकिए पर रखकर खींचे।

-विभिन्न यंत्रों के इस्तेमाल द्वारा अपने हाथों का नए ढंग से इस्तेमाल करना सीखें।

-दूसरे हाथ का भी अधिक इस्तेमाल करें।

-ज्यादा देर तक अपनी कलाई को नीचे झुका कर न रखें।

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