त्रिपुरा शाही वंशज ने अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ कथित भाई-भतीजावाद पर दी प्रतिक्रिया

त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) में सत्तारूढ़ टिपरा मोथा के अध्यक्ष एवं शाही वंशज प्रद्योत किशोर देववर्मन ने एडीसी प्रशासन द्वारा हाल ही में कथित भाई-भतीजावाद के तहत अपनों को नौकरी देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और अपने नेताओं को ऐसी किसी भी तरह की गतिविधि से दूर रहने की चेतावनी दी है।

प्रद्योत पिछले कुछ सप्ताह से राज्य से बाहर गए हुए हैं, लेकिन वह रोजगार प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की खबरों से परेशान हैं। उन्होंने हालांकि शिकायतों का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका सोशल मीडिया पोस्ट एडीसी में चल रही भर्तियों में अनियमितता की ओर स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

प्रद्योत ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “राज्य में जब हजारों लोग बेरोजगार हैं तो टिपरा पार्टी से संबंधित परिवार के किसी भी सदस्य तत्काल कोई नौकरी नहीं दी जाएगी। मैं अपना उपचार कराकर वापस लौट रहा हूं। इस तरह की चीजों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमारी एकमात्र प्रतिबद्धता ग्रेटर टिपरालैंड बनाने की होनी चाहिए, जब तक मैं वहां हूँ, मैं ऐसी परंपरा अपनाने की अनुमति नहीं दूंगा।”

रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी भारती जनता पार्टी (भाजपा) ने टिपरा मोथा के विकास परिषद के सदस्यों और नेताओं पर सभी नियमों और प्रक्रियाओं को ताक में रखकर भाई-भतीजाबाद अपनाकर अपने पसंदीदा लोगों और रिश्तेदारों को नौकरी प्रदान करने का आरोप लगाया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टिपरा मोथा के सदस्यों के एक वर्ग ने इस मामले को प्रद्योत के पास पहुंचाया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदार सूचीबद्ध किए गए उम्मीदवारों में हैं और कुछ हद तक प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को चयन से वंचित रखा गया है।

एडीसी परिषद में भाजपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ टिपरा नेता सिंधु कन्या जमातिया की बेटी को एडीसी के शिक्षा विभाग में एक पद के लिए चुना गयी है। वरिष्ठ नेता के पास महिला टिपरा फेडरेशन के सचिव का प्रभार है।

एडीसी में विपक्षी भाजपा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने टिपरा मोथा के खिलाफ विभिन्न विभागों में नौकरियों के वितरण में भ्रष्टाचार, पक्षपात और भाई-भतीजावाद में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए एक अभियान शुरू किया है। जिसने प्रद्योत को अगले तीन महीने में होने वाले ग्राम परिषद चुनावों और छह महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही मुसीबत में डाल दिया है।

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