Uric Acid को कंट्रोल करने में रामबाण है तुलसी, जानिए डाइट में शामिल करने का तरीका

यूरिक एसिड के कारण गठिया, गाउट और जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है। हाई यूरिक होने के कारण शरीर के कई हिस्से प्रभावित होते हैं। आमतौर पर यह समस्या तब होती है जब किडनी अपने फिल्टर करने की क्षमता को कम कर देता है। यूरिक एसिड एक केमिकल है जो शरीर में तब बनता है जब प्यूरिन नामक तत्व ब्रेकडाउन होता है। ऐसे में आपको अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है और यूरिक एसिड को भी कंट्रोल करने की जरूरत है। इसलिए आप अपनी डाइट में तुलसी जरूर शामिल करें। तुलसी में मौजूद तत्व यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है। आइए जानते हैं डाइट में कैसे करें शामिल-

तुलसी कैसे यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है: तुलसी में अल्सोलिक एसिड, यूजेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट उच्च मात्रा में मोजूद होता है जो यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा तुलसी गाउट और जोड़ों के दर्द से भी राहत दिलाने में मददगार है। साथ ही तुलसी यूरिक एसिड के लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है। तुलसी शरीर को डिटॉक्स करता है और इसमें ड्यूरेटिक इफेक्ट होता है। यह शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को कम करता है, जो कि किडनी की पथरी बनने का मुख्य कारण है।

तुलसी को डाइट में कैसे करें शामिल: तुलसी का नियमित रूप से सेवन यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करता है। तुलसी की पत्तियों को कालीमिर्च और घी के साथ मिलाकर खाएं। अगर आप इसका सेवन रोजाना दिन में कम से कम एक बार खाएंगें तो इससे आपको लाभ मिलेगा।

तुलसी खाने के अन्य लाभ: तुलसी में विटामिन-सी होता है जो इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है और इंफेक्शन से लड़ने में भी मदद करता है। सांस से जुड़ी समस्याओं के लिए भी तुलसी खाना फायदेमंद होता है। इसके अलावा जो लोग तुलसी नियमित रूप से खाते हैं उनमें हृदय से संबंधित समस्या होने का खतरा भी कम हो जाता है। तुलसी खाने से तनाव भी कम होता है। साथ ही जिन लोगों को स्किन से जुड़ी समस्या होती है उनके लिए भी तुलसी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। जिन लोगों को किडनी से जुड़ी समस्या होती है उनके लिए भी तुलसी फायदेमंद होता है।

यह भी पढ़े-

Naagin 6: प्रथा का दायां हाथ बनकर दमदार एंट्री मारेगा TV का यह हैंडसम मुंडा, ऋषभ की करेगा छुट्टी