नवजात शिशुओं में होता है अम्बिलिकल हर्निया, ऐसे होंगा इसका निदान

नवजात शिशुओं में जन्म लेते समय कई ऐसी बीमारियां शरीर में उतपन्न हो जाती हैं। इनमे से एक बीमारी है अम्बिलिकल हर्निया की।  इसमें शिशु की नाभि बाहर की तरफ निकल जाती है। इस बीमारी में अगर बच्चे की नाभि 3 से 4 साल की उम्र में भी उभरी हुई रहती है तो यह अम्बिलिकल हर्निया बीमारी कहलाती है।

क्यों होता है अम्बिलिकल हर्निया

यह बीमारी बच्चों में जन्म के 2 से 3 साल बाद नज़र आती है।  इसमें शिशु के पेट में कमज़ोर हिस्से पर दबाव बनता है जिससे वह उभरा हुआ नज़र आता है। अधिकतर यह बीमारी पैदा होने के शुरुआती दिनों में बच्चों में देखनी को मिलती है परन्तु यह बच्चों में कुछ समय बाद अपने आप सही हो जाती है।

कैसे बचें अम्बिलिकल हर्निया से?

यह बीमारी अधिकतर छोटे बच्चों में होती है जिसको ठीक करने के लिए सर्जरी को अपनाया जाता है। इस बीमारी में नवजात शिशु को दर्द होता है और बच्चे का सही ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो पाता है। बहुत बार ऐसा भी होता है जब बच्चे को आंत में मरोड़ का सामना भी करना पड़ सकता है।

ऐसे किया जाता है अम्बिलिकल हर्निया का टेस्ट

अम्बिलिकल हर्निया में नवजात शिशु की नाभि की जांच की जाती है और फिर डॉक्टर्स द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है।  इसमें बच्चों का एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड किया जाता है ताकि शरीर के अंदरूनी अंग में किसी भी तरह की समस्या न हो। इस बीमारी में ब्लड इंफेक्शन या एस्केमिया जैसी बीमारी होने पर खून का टेस्ट भी किया जाता है।

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