संकट के समय में असंवैधानिक फैसला कर रहे हैं सीएम अरविंद केजरीवाल?

अपने देश के नागरिकों को एक राज्य से दूसरे राज्यों में जाने, रहने, नौकरी करने, शिक्षा तथा स्वास्थ्य आदि सभी अधिकार होते हैं। अगर किसी को ये पता चलता है कि उसे अपने ही देश में भेदभाव का शिकार होना पड़ेगा, दूसरे राज्य में इलाज नहीं हो पायेगा तो आम लोगों में डर का माहौल बनना स्वाभाविक है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के अस्पतालों को सिर्फ दिल्लीवालों के लिए रिजर्व करने का फैसला लिया था जिसके बाद लोगों में डर का माहौल बन गया। CM केजरीवाल ने रविवार को इस बात की घोषणा की थी कि दिल्ली सरकार के अंदर आने वाले सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही कोरोना का इलाज किया जाएगा।

लेकिन दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने 24 घंटे से भी कम समय में इस आदेश पर रोक लगाया जिससे लोगों को राहत मिली। उप-राज्यपाल ने कहा कि दिल्ली सरकार का फैसला समानता के अधिकार, जीवन जीने के अधिकार और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन कर रहा था, जिसकी वजह से उसे पलटना पड़ा।

दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने कहा – हम सभी भारतीय हैं और दिल्ली सबकी है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी जिम्मेदार सरकार निवास के आधार पर मरीजों के साथ भेदभाव करने का प्रयास कर रही है। यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह संविधान के अनुच्छेदों के अनुरूप अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए।