अनियंत्रित यूरिक ऐसिड से होती है गठिया, जानिए कैसे करें नियंत्रित

शरीर में हड्डियों के दर्द का एक बड़ा कारण यूरिक ऐसिड हो सकता है। इसके कारण शरीर में गठिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

हमारे शरीर में प्यूरिन के टूटने से यूरिक ऐसिड बनता है। यह खून के माध्यम से किडनी तक पहुंच जाता है। यूरिक ऐसिड यूरीन के रूप में शरीर के बाहर निकल जाता है, लेकिन कभी-कभी यह शरीर में ही रुक कर गंभीर परेशानी का सबब बन जाता है। इसलिए यूरिक ऐसिड की मात्रा को नियंत्रित करना जरूरी होता है। नैचरल तरीके से यूरिक ऐसिड को कैसे कंट्रोल किया जाए, आइये जाने .

विटमिन सी का ज्यादा इस्तेमाल

शरीर में यूरिक ऐसिड का स्तर कम करने के लिए नियमित रूप से विटमिन सी की भरपूर खुराक लें। इसके लिए नींबू और संतरा खा सकते हैं। इससे आपका यूरिक ऐसिड का स्तर 1-2 महीनों में बिलकुल घट जाएगा।

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ

यूरिक ऐसिड की ज्यादा मात्रा सही मायने में गड़बड़ लाइफस्टाइल का एक कारण है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि अपने आहार की आदतों को ठीक करें। साथ ही खाने में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

बेकरी प्रॉडक्ट्स से बचें

संतृप्त एवं ट्रांस फैट से भरपूर खाना यूरिक ऐसिड का स्तर बढ़ाते हैं, इसलिए बेकरी के उत्पाद जैसे पेस्ट्रीज, कुकीज से दूर रहें।

चेरी खाएं

चेरी में मौजूद केमिकल तत्व शरीर के यूरिक ऐसिड को गंदगी के रूप में शरीर से बाहर निकाल देते हैं, जिससे यूरिक ऐसिड का स्तर कंट्रोल में रहता है।

सेब का सिरका

सेब का सिरके का सेवन करने से यूरिक ऐसिड का स्तर कम हो जाता है। सिरका खून का ph लेवल बदल देता है, जो कि यूरिक ऐसिड का लेवल कम करने में काफी लाभदायक होता है।

गर्म पानी में पिएं नींबू का रस

सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू का रस लेना चाहिए। नींबू में पाया जाने वाला साइट्रिक यूरिक ऐसिड को खत्म करता है।

जैतून के तेल में खाना पकाएं

जैतून के तेल में बना आहार शरीर के लिए बेहद लाभदायक होता है। इसमें विटमिन ई की भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो यूरिक ऐसिड का लेवल कम करता है।

फाइबर युक्त भोजन करें

यदि आप अपने भोजन में फाइबर की मात्रा को बढ़ा देते हैं तो आपके शरीर में यूरिक ऐसिड का स्तर भी सही बना रहेगा। इसकी आपूर्ति ईसबगुल, हरी गोभी, पालक, और ओट्स से होती है।

अजवाइन का उपयोग करें

अजवाइन में दर्द दूर करने वाले ऐंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसलिए यह पेशाब से संबंधित विकार को दूर करने में मदद करती है।