संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने कहा-साक्षरता को बढ़ावा देकर डिजिटल विभाजन को बंद करना होगा

United Nations Secretary-General Guterres said – Digital divide has to be closed by promoting literacy

बाली (एजेंसी/वार्ता)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि गरीब देशों के लिए सही नीतियों के साथ, डिजिटल तकनीक सतत विकास को अभूतपूर्व बढ़ावा दे सकती है। साथ ही हमें डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर डिजिटल विभाजन को भी बंद करना होगा।

गुटेरेस ने जी-20 देशों की शिखिर सम्मेलन में डिजिटल परिवर्तन पर अपनी टिप्पणी में कहा कि डिजिटल तकनीक सतत विकास को अभूतपूर्व बढ़ावा दे सकती है लिहाजा अधिक से अधिक लोगों तक इससे जोड़कर डिजिटल विखंडन को रोका जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इस काम में रुकावटों को दूर कर आपस में जोड़ा जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों के लिए अधिक स्वायत्तता कम दुरुपयोग और दुष्प्रचार पर ध्यान दिया जाना चाहिये।

श्री गुटेरेस ने कहा, “यह स्पष्ट है कि मार्गदर्शन और सुरक्षा के बिना डिजिटल तकनीक में भी नुकसान की भारी संभावना है – मुक्त भाषण के दमन से लेकर सीमाओं पर दुर्भावनापूर्ण हस्तक्षेप तक, और लोगों, मुख्य रूप से महिलाओं, को ऑनलाइन लक्षित करना और उनका उत्पीड़न करना।”

उन्होंने कहा,“इसलिए मैंने सभी के लिए एक खुले, मुक्त, समावेशी और सुरक्षित डिजिटल भविष्य पर एक वैश्विक डिजिटल कॉम्पैक्ट का प्रस्ताव दिया है। जिस पर 2024 में संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के शिखर सम्मेलन में सरकारें सहमत होंगी, जिसमें प्रौद्योगिकी कंपनियों, नागरिक समाज, शिक्षाविदों और अन्य लोगों के विचार आमंत्रित किये जायेंगे।” उन्होंने कहा कि यह डिजिटल कॉम्पैक्ट मानव अधिकारों में मजबूती से जुड़ा हुआ है – एक तकनीक के लिए एकमात्र सुसंगत दृष्टिकोण जो हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है। इसका लक्ष्य तीन क्षेत्रों में वितरित करना है।

सबसे पहले, सार्वभौमिक कनेक्टिविटी का अर्थ उन तीन अरब लोगों तक पहुंचना है जो ऑफ़लाइन हैं, जिनमें से अधिकांश वैश्विक दक्षिण में रहते हैं। हमें डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर और महिलाओं और लड़कियों, प्रवासियों, ग्रामीण और स्वदेशी लोगों को डिजिटल दुनिया तक पहुंच प्रदान करके डिजिटल विभाजन को बंद करना होगा।

उन्होंने कहा, दूसरा, एक मानव-केंद्रित डिजिटल स्थान मुक्त भाषण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऑनलाइन स्वायत्तता और गोपनीयता के अधिकार के संरक्षण के साथ शुरू होता है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असिमित नहीं है। ग्लोबल डिजिटल कॉम्पेक्ट को लोकतंत्र, मानवाधिकारों और विज्ञान को कमजोर करने वाले ऑनलाइन बुलिंग और घातक दुष्प्रचार को रोकने के लिए सरकारों, तकनीकी कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने बताया,“ तीसरा, सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा में अपार और बेरोज़गार क्षमता है। एसडीजी की प्रगति को समझने और प्रभाव को मापने के लिए हमारे पास केवल आधा डेटा है। वहीं, लोगों के निजी डेटा का इस्तेमाल उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया जा रहा है, कभी राजनीतिक नियंत्रण के लिए तो कभी व्यावसायिक लाभ के लिए।”

-एजेंसी/वार्ता

यह भी पढ़े: जी20 शिखर सम्मेलन: मोदी ने सिंगापुर को किया आमंत्रित, कहा-भारत में हरित अर्थव्यवस्था में करें निवेश