Thyroid के मरीजों के लिए रामबाण है हल्दी का इस्तेमाल, जानिये यूज करने का तरीका

आज के समय में थायरॉयड की परेशानी आम हो गई है। खराब जीवन-शैली व अनहेल्दी खानपान के कारण लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पहले जहां उम्रदराज लोग थायरॉयडड की चपेट में आते थे वहीं, आज व्यस्क भी इस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। थायरॉयड बीमारी को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धारे सामने आते हैं। थायरॉयड गर्दन में मौजूद एक ग्लैंड को कहते हैं जो थायरोक्सिन हार्मोन प्रोड्यूस करती है। ये हार्मोन ह्यूमन एक्टिविटीज के लिए सीमित मात्रा में जरूरी है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति में इस हार्मोन का प्रोडक्शन अत्यधिक मात्रा में होता है तो उससे थायरॉयड बीमारी हो जाती है। इस बीमारी के मरीजों को अपनी जीवन-शैली का खास ख्याल रखना चाहिए। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ मरीजों को अपनी डाइट में हल्दी को शामिल करने की सलाह देते हैं।

सूजन कम करने में मददगार: हल्दी में कर्क्यूमिन मेन एलिमेंट होता है, ये सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। हल्दी में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं, इस कारण सूजन से परेशान थायरॉयड के मरीजों के लिए इसका सेवन लाभदायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, अपनी एंटी-बायोटिक, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण हल्दी के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा भी कम होता है।

फ्री रैडिकल्स से लड़ने में कारगर: हाइपर और हाइपो दोनों ही तरह के थायरॉयड में शरीर में फ्री रैडिकल्स बनने लगते हैं जो शरीर को क्षति पहुंचाते हैं। ये फ्री रैडकल्स कोशिकाओं को हानि पहुंचाते हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों में ये फ्री रैडिकल्स और भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके कारण शरीर के कई हिस्सों के साथ लोगों की इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। वहीं, हल्दी के सेवन से इन रैडिकल्स को कंट्रोल में करना आसान हो जाता है। हल्दी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट इन फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मददगार हैं।

गांठों को करता है दूर: थायरॉयड के कई गंभीर मामलों में मरीज की थायरॉयड ग्रंथि में छोटी-छोटी गांठ फॉर्म होने की शिकायत हो सकती है। इन गांठों को थायरॉयड नॉड्यूल्स कहा जाता है। हल्दी का इस्तेमाल करने से इन गांठों के आकार धीरे-धीरे छोटे हो जाते हैं। इसके अलावा, थायरॉयड के स्तर को कंट्रोल करने में भी हल्दी फायदेमंद है।

ऐसे करें इस्तेमाल: आमतौर पर थायरॉयड के मरीजों के लिए हल्दी का किसी भी रूप में सेवन करना फायदेमंद ही साबित होगा। सब्जी में हल्दी का तड़का, हल्दी वाला दूध का सेवन कर आप इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा, मरीज नियमित तौर पर 1 से 2 कप हल्दी वाली चाय भी पी सकते हैं।

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