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क्रिकेट हिस्ट्री: मैदान पर अगर रोता नहीं यह क्रिकेटर तो भारत के पास होते तीन वर्ल्ड कप

टीम इंडिया के कई सितारे ऐसे भी हैं जो खेलते तो थे बहुत बढिय़ा लेकिन, कुछ कारणों से वह गुमनामी में चले गए और क्रिकेट का एक रिकॉर्ड में दर्ज नाम बनकर रह गए। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं विनोद कांबली। इनके बारे में कहा जाता है कि वह सचिन तेंदुलकर के बचपन के सखा हैं और साथ बड़े हुए और क्रिकेट खेला। लगभग साथ साथ ही टीम इंडिया में खेले भी और तो और दोनों के क्रिकेट गुरू (आचरेकर) भी एक ही थे।। सचिन तो आगे बढ़ते चले गए लेकिन, कांबली के साथ कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वह क्रिकेट का इतिहास बनकर रह गए। विनोद कांबली का जन्म 18 जनवरी 1972 को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हुआ था। कांबली मध्य क्रम के बल्लेबाज थे। कांबली अपनी घरेलू टीम मुंबई और बोलैंड, दक्षिण अफ्रीका के लिए भी खेले।

उनके पास भारतीय टेस्ट क्रिकेटर के लिए 54 में सबसे अधिक करियर औसत है, लेकिन उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट तब खेला जब वह सिर्फ 23 साल के थे। इसके बाद, उन्हें केवल एक दिवसीय क्रिकेट खेलने के लिए ही मौका मिला। उनका क्रिकेट करियर ज्यादा लंबा नहीं चल पाया। कहा जाता है कि उनके करियर के बुरा वक्त तब से शुरु हो गया था जब वह 1996 के वल्र्ड कप के सेमीफानल में ईडन गार्डन में श्रीलंका के खिलाफ खेल रहे थे।

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तभी टीम इंडिया के विकेट गिरते चले गए। तकरीबन आठ विकेट गिरने के बाद स्कोर हासिल करने के लिए भारत को 100 रन से ज्यादा रनों की दरकार थी। लेकिन, वहां मौजूद भारतीय दर्शकों का सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने मैदान में आगजीन और उत्पात शुरु कर दिया और इस बात से नाराज अंपायर और मैच कमेटी ने श्रीलंका को जीत घोषित कर दी। उस वक्त बेटिंग पर विनोद कांबली थे। उनको इस बात का विश्वास था कि मैं खेलता रहा तो शायद मैच जीत लूंगा लेकिन, दर्शकों के उत्पात से मिली हार के कारण कांबली के सब्र का बांध टूट गया ओर वह मैदान के बाहर आ गए। जब वह मैदान पर आए तो उनकी आंखों में आंसू आ गए ओर रोने लगे। उनका इस तरह रोना भारतीयों को अंदर तक टीस दे गया और कांबली उसके बाद टीम इंडिया का हिस्सा लंबे समय तक नहीं रह सके। कहा जाता है कि अगर उस वक्त भारतीय दर्शक संयम रखते तो शायद टीम इंडिया मैच जीत सकती थी और भारत की झोली में तीन विश्व कप होते।

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