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कब जारी किये जाते हैं मौसम के रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट ?

मौसम विभाग द्वारा मौसम से संबंधित चेतावनी देने के लिए रेड अलर्ट, ऑरेंज अलर्ट, येलो अलर्ट और ग्रीन अलर्ट को जारी किया जाता है| चेतावनी देने के लिए रंगों का चुनाव कई एजेंसियों के साथ मिलकर किया जाता है| इन अलर्ट को मौसम के ख़राब होने की तीव्रता के आधार पर जारी किया जाता है| सबसे भीषण चक्रवात के लिए रेड अलर्ट जारी किया जाता है|

आइये जानते हैं इन अलर्ट के बारे में :-

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1. रेड अलर्ट: रेड अलर्ट का मतलब होता है खतरनाक स्थिति|जब भी कोई चक्रवात तेज बारिश के साथ हवा की रफ़्तार 130 किमी. प्रति घंटा (केवल यही एक पैमाना नहीं) से अधिक तो मौसम विभाग की ओर से तूफ़ान की रेंज में पड़ने वाले इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया जाता है |जब मौसम खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है और भारी नुकसान होने का खतरा रहता है तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है.

2. ऑरेंज अलर्ट: मौसम विभाग के अनुसार मौसम जैसे-जैसे खराब होता जाता है, वैसे ही येलो अलर्ट को अपडेट करके ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है| ऑरेंज अलर्ट के अंतर्गत इस प्रकार की वार्निंग जारी की जाती है | इस चक्रवात के कारण मौसम के बहुत अधिक ख़राब होने की संभावना है जो कि सड़क और वायु परिवहन को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ जान और माल की क्षति भी कर सकता है|

चक्रवात में हवा की स्पीड लगभग 65 से 75 किमी. प्रति घंटा होती है और 15 से 33 मिमी. की घनघोर बारिश होने की संभावना रहती है| इस अलर्ट में प्रभावित क्षेत्र में खतरनाक बाढ़ आने की प्रबल संभावना होती है|
3. येलो अलर्ट: मौसम विभाग येलो अलर्ट का प्रयोग लोगों को सचेत करने के लिए करता है| इसका मतलब होता है “खतरे के प्रति सचेत रहें उदासीन नहीं”| बता दें यह अलर्ट जस्ट वॉच का सिग्नल है| इस प्रकार की चेतवानी में 7.5 से 15 मिमी. की भारी बारिश होती है जो कि अगले 1 या 2 घंटे तक जारी रहने की संभावना होती है
4. ग्रीन अलर्ट: कई बार मौसम विभाग द्वारा ग्रीन अलर्ट जारी किया जाता है| इसका मतलब होता है कि संबंधित जगह पर कोई खतरा नहीं है|
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