कौन थे आचार्य चाणक्य? जानिए, उनसे जुड़ी ये खास बातें

चाणक्य चाणक्य अर्थशास्त्र के आचार्य थेl अर्थशास्त्र के साथ-साथ गुरु चाणक्य अपने शिष्यों को राजनीति और कूटनीति की शिक्षा भी दिया करते थेl अपनी कूटनीतियों की वजह से आचार्य चाणक्य ने सिकंदर को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया थाl एक सामान्य बच्चे चन्द्रगुप्त को ‘सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य’ बनाने में चाणक्य जी ने अहम भुमिका निभाई थीl चाणक्य ने ‘नीति शास्त्र’ की रचना की थी जिसमें बताया गया है कि अपने जीवन को सरम, सुगम और सुखी कैसे बनाया जा सकता हैl

नीति श्लोक

वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्।

रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।।

आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार एक समझदार पुरुष वही है जो किसी स्त्री की बाहरी सुन्दरता से नहीं बल्कि उसके गुणों से प्रभावित होता हैl जो पुरुष सिर्फ स्त्री की बाहरी सुन्दरता से आकर्षित होकर विवाह कर लेता है वो अपने वैवाहिक जीवन में सुखी नहीं रह पाता क्योंकि उसे स्त्री के गुण-दोषों के बारे में पता ही नहीं होता हैl

संस्कार

यदि कोई संस्कारी स्त्री सुंदर न हो तो भी उससे विवाह कर लेना चाहिए l एक गुणी और संस्कारी स्त्री ही परिवार को संभाल सकती हैl संस्कारी कन्या के आचार-विचार शुद्ध होते हैं और ऐसी कन्या ही परिवार को आगे ले जा सकती हैl

चरित्र

विवाह करने से पहले स्त्री के चरित्र के बारे में पता करना बेहद अहम हैl यदि कोई स्त्री सुंदर हो परन्तु उसका चरित्र अधार्मिक हो तो ऐसी स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि वो परिवार के लिए ठीक नहीं होगी l ऐसी स्त्री परिवार को तोड़ सकती है और परिवार के सदस्यों के बीच मन-मुटाव पैदा कर सकती हैl

सादगी और संतोष

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बिमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं हैl एक पुरुष को विवाह करते समय स्त्री की सुन्दरता से नहीं बल्कि उसकी सादगी से प्रभावित होना चाहिएl

आचार्य चाणक्य ने कहा है कि किसी मित्र को संकट में परखा जा सकता है, किसी रिश्तेदार को कठनाई में परन्तु पत्नी को घोर विपत्ति में ही परखा जा सकता हैl

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