विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाया जाता है? जानिए यहां

सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है और उन्हें देवता समान माना जाता है।भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन का देवता माना जाता है। तकनीकी जगत के भगवान विश्वकर्मा जी का त्यौहार प्रतिवर्ष कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है जोकि अमूमन 17 सितंबर को पड़ती है। आम बोलचाल की भाषा में इसे विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है।

मान्यता यह है कि स्वर्ग के राजा इंद्र का अस्त्र वज्र का निर्माण विश्वकर्मा ने ही किया था। साथ में जगत के निर्माण के लिए विश्वकर्मा ने ब्रह्मा की सहायता की थी और संसार की रूप रेखा का नक्शा तैयार किया था। इस संसार को बनाने में जितनी ब्रह्मा जी की कृपा है उतना ही विश्वकर्मा जी की मेहनत है।

आपको यह जानकर और ज्यादा हैरानी होगी कि ओडिशा में स्थित भगवान जगन्नाथ समेत बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण भी विश्वकर्मा ने किया था और भी बड़े-बड़े कारनामे विश्वकर्मा के नाम लिखे हुए हैं। माता पार्वती के कहने पर ही विश्वकर्मा ने सोने की लंका का निर्माण किया था। जब हनुमान जी ने सोने की लंका जला दी थी।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि राज्यों में की जाती है। जो भी लोग कारखाने फैक्ट्री या फिर मशीनों से संबंधित कारोबार में काम करते हैं उनका यह मानना है कि विश्वकर्मा जी की पूजा करने से मशीनें जल्दी खराब नहीं होती और अच्छे से काम करती हैं, साथ ही मशीन काम में कभी भी धोखा नहीं देती।

इस दिन बड़ी फैक्ट्री हो या छोटा कारोबार हर जगह लोग अपने काम को रोक कर अपनी मशीनों की साफ सफाई करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। ताकि वह अपने काम में बरकत पा सकें।

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