रेपो रेट में होगा इजाफा? आज से शुरू हो रही RBI की बैठक पर टिकी सभी की निगाहें

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन चलने वाली द्विमासिक बैठक तीन अगस्त यानी आज से शुरू हो रही है। यह बैठक के नतीजों की जानकारी 5 अगस्त को आरबीआई की तरफ से साझा की जाएगी। इस बैठक से यह साफ हो जाएगा कि क्या आरबीआई की तरफ से फिर से रेपो रेट में इजाफा होगा या नहीं। बता दें, महंगाई का मौजूदा स्तर दुनिया भर के सेंट्रल बैंक पर ब्याज दरों को बढ़ाने का दबाव बना रहा है।

रेपो रेट में 90 बेसिस का इजाफा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मई में रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट और फिर जून में 50 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है। वहीं, यूएस फेड ने महंगाई से निपटने के लिए अपनी दरों में 225 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है। इसकी तुलना में भारत के सेन्ट्रल बैंक ने 90 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है।

चौथी तिमाही में महंगाई दर में आएगी गिरावट!

RBI के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक महंगाई दर 6% से अधिक ही रहेगा। चौथी तिमाही में इसमें गिरावट आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आरबीआई का अनुमान है कि महंगाई दर 6.7% रहेगी। RBI के अनुसार इस तिमाही में महंगाई दर 7.4% रहेगी।

रेपो रेट को लेकर एक्सपर्ट की क्या है राय?

बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है, ”हमारा मानना है कि एमपीसी पांच अगस्त को रेपो दर में 0.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगी। साथ ही वह अपने रुख को धीरे-धीरे सख्त करेगी।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेपो दर में आक्रामक 0.50 प्रतिशत या कुछ नरम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फेडरल रिजर्व ने कैलेंडर साल 2022 में ब्याज दरों में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि की है।

इससे ऐसी संभावना बन रही है कि रिजर्व बैंक भी ब्याज दरों में तय समय से पहले अधिक वृद्धि कर सकता है। रिपोर्ट कहती है, ”हालांकि भारत में परिस्थितियों को देखते हुए अभी आक्रामक रुख की जरूरत नहीं है हाउसिंग.कॉम के सीईओ ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि अमेरिका सहित दुनिया के अन्य देशों के बैंकिंग नियामक आक्रामक तरीक से ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं।

लेकिन भारत में स्थिति ऐसी नहीं है। यहां आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा अनुमान है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 0.20 से 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा।

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