विश्व आर्थिक मंच: गोयल ने भारतीय उद्यमियों को देश में ही खरीद करने आग्रह किया

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को भारतीय भारतीय उद्यमियों से अपील की कि वे जहां कहीं भी अवसर हो, स्थानीय स्तर पर खरीद करें ताकि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला सशक्त और अधिक समर्थवान हो सके।

श्री गोयल ने कहा कि उद्योग और सरकार साझा सपनों की दिशा में मिल भारत 2030 तक 1000 अरब डालर मूल्य के माल और सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने भारतीय व्यवसायों से मूल्य वर्धित निर्यात को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया और कहा कि प्रधानमंत्री गति शक्ति बुनियादी ढांचे की योजना बनाने और सामान पहुंचाने की लागत को कम करने में मदद करेगी। उन्होंने दुनिया भर में भारतीय राजनयिक मिशनों से भारतीय उद्योगों का समर्थन करने और भारतीय कारोबारियों की अच्छी बातों को दूसरों के सामने लाने का भी आग्रह किया।

वह स्विट्जरलैंड के दावोस में सुबह नाश्ते के समय “व्यापार 4.0 पर एक चर्चा सत्र” को संबोधित कर रहे थे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री गोयल ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक आश्रय पर अंकुश लगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से आग्रह किया, ‘जहां कहीं भी अवसर हो, स्थानीय स्तर पर खरीद करें ताकि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो और समर्थवान हो।’ श्री गोयल के पास उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री की भी जिम्मेदारी है।

श्री गोयल ने कहा कि भारत की उपलब्धियों को आज दुनिया में उत्साह से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्ष से कोविड-19 महामारी, चिप की कमी, भू-राजनीतिक संघर्ष,जिंसों के भाव में उछाल, कंटेनर की कमी और जहाजरानी सेवा क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और रसद मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में भारी व्यवधान पैदा हुए हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था का संतुलन बिगड़ गया है। ऐसे हालात में भारतीय व्यवसायों ने परिस्थितियों का सामना करने का बड़ा सामर्थ्य दिखाया है। देश ने निर्यात लक्ष्यों को पार कर 2021-22 में 421.8 अरब डालर का निर्यात किया जो एक रिकार्ड है।

श्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कथन का उल्लेख किया कि इन सभी समस्याओं के बीच भारत मरुस्थल में उद्यान जैसा दिखता है जो देश में पारदर्शिता, भरोसे है और समयबद्धता की की झलक देता है। उन्होंने कहा कि भारत ने हर संकट का समय पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय व्यवसायों के सामर्थ्य और राजनीतिक नेतृत्व के सामर्थय और आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा , ‘‘साझा सपने की दिशा में यदि हम एक टीम के रूप में काम करते हैं, तो भारत 2030 तक 1000 अरब डालर मूल्य के माल और सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में सरकार ने संरचनात्मक सुधारों पर व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित किया है जिससे प्रत्येक संकट के समय में भारत मजबूती से खड़ा रहा। इसी संदर्भ में उन्होंने डिजिटल इंडिया पहल का जिक्र किया जिसने महामारी से प्रेरित लॉकडाउन के दौरान भारत को काम करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत, जन धन-आधार-मोबाइल का तिरफा मेल, वित्तीय समावेशन, आयुष्मान भारत, टीकाकरण कार्यक्रम आदि जैसे मिशनों ने भारत को दुनिया के साथ अगले स्तर के विकास और जुड़ाव के लिए तैयार करने में मदद की है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भारत को आपूर्ति के स्रोतों के मामले में यथास्थितिवादी दृष्टिकोण छोड़ कर एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख सकती है। उन्होंने विदेशी निवेशकों को भारत में विनिर्माण, निवेश और प्रौद्योगिकी के लिए आने का आह्वान किया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने, ब्याज दरों को नियंत्रण में रखने और रुपये के मूल्यह्रास पर लगाम लगाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं ताकि विकास और समृद्धि प्रभावित न हो।

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