विश्व पर्यावरण दिवस: क्यों बाजार में बिकने लगी फ्री मिलने वाली ऑक्सीजन ? पढ़िए पूरी जानकारी

आज विश्व पर्यावरण दिवस है। कोरोना लॉकडाउन की वजह से विश्व भर का पर्यावरण इस बार पहले से बहुत बेहतर है। प्रकृति का सरंक्षण ही पर्यावरण को बचाये रखने का एकमात्र जरिया है। पेड़ों से हमें प्राणवायु ऑक्सीजन प्राप्त होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक वयस्क पौधा हर साल करोड़ों रुपए की ऑक्सीजन हमारे लिए फ्री में देता है। इसलिए पौधे हमारे जीवन में काफी महत्त्व रखते है। लेकिन आज के समय में प्राकृतिक जंगल तेजी से खत्म हो रहे है।

विशेषज्ञ बताते है कि एक वयस्क पेड़ रोजाना औसतन 230 लीटर ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है। इस दौरान वह वातावरण में मौजूद 48 पाउंड कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित भी करता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि पेड़ के पास कचरा जलाने से इसकी ऑक्सीजन उत्सर्जित करने की क्षमता काफी कम हो जाती है। इसलिए कभी भी पेड़ के पास कचरा नहीं जलाये। एक बात और, वो यह है कि एक व्यक्ति को रोज 550 लीटर ऑक्सीजन चाहिए।

इंसान ऑक्सीजन को सांस के जरिये ग्रहण करता है। जो भी हवा हमारे शरीर में सांस के जरिये फेफड़ों में जाती है, उसमें 20 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है। इसलिए औसत तौर पर हर व्यक्ति को जिंदा रहने के लिए करीब तीन पौधों की जरुरत होती है। आपको जानकर खुशी होगी कि हमारे आस-पास रहने वाले पीपल , नीम, बरगद और तुलसी जैसे पेड़ों से हमें सबसे ज्यादा ऑक्सीजन प्राप्त होती है। ऑक्सीजन बनाने का काम पेड़ की पत्तियों का होता है।

आज के समय में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी स्तिथि में ऑक्सीजन को बाजार में भी बेचा जा रहा है। फ्री में मिलने वाली ऑक्सीजन आज के समय में बाजार में महंगे दामों में बिक रही है। आपको हैरानी होगी की ऑनलाइन कंपनियां 8500 रुपये में 750 लीटर ऑक्सीजन का सिलेंडर बेचती है। इस हिसाब से एक व्यक्ति के लिए सालभर में करीब 23 लाख रुपये की ऑक्सीजन की जरुरत होगी। पेड़ अस्थमा की आशंका खत्म करते है।

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