दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के पास नहीं है DRS के लिए पैसा, फिर निशाने पर BCCI

रणजी ट्रॉफी 2022 का फाइनल मुकाबला मध्य प्रदेश और मुंबई के बीच बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस खिताबी मुकाबले की लाइव टेलीकास्टिंग और स्ट्रीमिंग हो रही है, लेकिन एक बात से सभी हैरान हैं कि इस मैच में डिसिजन रिव्यू सिस्टम यानी डीआरएस उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से फॉर्म में चल रहे मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान को एक ‘जीवनदान’ मिल गया, जिससे मैच का नतीजा बदल सकता है।

एमपी के तेज गेंदबाज गौरव यादव की एक करीबी एलबीडब्ल्यू अपील को अंपायर ने स्वीकार नहीं किया और रीप्ले में देखकर पता चलता है कि शायद वे आउट थे। इस वजह से एक बार फिर से दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड यानी बीसीसीआई फिर से निशाने पर है, क्योंकि रणजी ट्रॉफी जैसे फाइनल डीआरएस उपलब्ध नहीं है।

इसके पीछे की वजह बताई गई है कि ये बहुत महंगी टेक्नोलॉजी है। इसलिए इसका यूज नहीं हो रहा है। ऐसा भी नहीं है कि बीसीसीआई ने रणजी ट्रॉफी में डीआरएस उपलब्ध नहीं कराया है। बोर्ड ने रणजी ट्रॉफी 2019-20 के सेमीफाइनल और फाइनल के दौरान ‘सीमित डीआरएस’ का प्रयोग किया था।

डीआरएस लागू होने वाले इस संस्करण में हॉक-आई और अल्ट्राएज टेक्नोलॉजी शामिल नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डीआरएस के लिए इन्हें प्रमुख माना जाता है, लेकिन रणजी ट्रॉफी के डीआरएस में इनको शामिल नहीं किया गया था।बीसीसीआई के एक अधिकारी ने टीओआई को बताया, ‘हमें अपने अंपायरों पर भरोसा है।

वहीं, भारत के एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा, “डीआरएस का उपयोग करना एक महंगा अभ्यास है। लागत बढ़ जाती है। फाइनल में डीआरएस न होने से क्या फर्क पड़ता है। यह समय है कि हम अंपायरों पर भरोसा करें। भारत के दो सर्वश्रेष्ठ अंपायर (केएन अनंतपद्मद्मदमनाभन और वीरेंद्र शर्मा) इस मैच में अंपायरिंग कर रहे हैं।

अंतिम परिणाम क्या है? यदि आप इसे फाइनल में इस्तेमाल करते हैं, तो आप इसे रणजी ट्रॉफी के लीग चरण में भी पेश करना चाहेंगे अधिकारियों का ये कहना है कि डीआरएस का उपयोग करना महंगा है तो ये जवाब बड़ा बचकाना लगता है, क्योंकि बोर्ड ने हाल ही में आईपीएल के मीडिया राइट्स से करीब 50 हजार (48,390) करोड़ रुपये कमाए हैं।

ऐसे में कम से कम रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मैच में डीआरएस का यूज होना चाहिए, जहां नतीजा बदलने के लिए एक गलत फैसला ही काफी हो सकता है, जो मैच का रुख बदल सकता है एक अन्य सूत्र ने बताया, “डीआरएस के लिए सभी उपकरणों की वायरिंग और डिरिगिंग बेहद महंगी होगी। हॉकआई का मतलब है कि आपको अतिरिक्त कैमरों की जरूरत है।

रणजी ट्रॉफी सीमित उपकरणों के साथ खेली जाती है। तब तर्क यह होगा कि कम से कम उन मैचों में इसका इस्तेमाल हो, जिन्हें टेलीविजन पर प्रसारित किया जाता है। देखिए, आप सीमित डीआरएस के साथ नहीं जा सकते। पिछली बार इसका उपयोग सीमित रीप्ले के लिए किया गया था ताकि यह देखा जा सके कि कोई ऐज है या नहीं। आप गेंद के ट्राजेक्टरी का उपयोग नहीं कर सकते, जो डीआरएस का एक महत्वपूर्ण तत्व ह

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