नहीं जानते होंगे आप जेनरिक दवाओं का ये सच !

अगर आप हमेसा बहुत ज्यादा बीमार रहते हैं तो डॉक्टर्स आपके लिये दो तरह की दवायें लिखता है। वो या तो पेटेंट होती हैं या फिर जेनरिक। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जेनरिक दवाओं का खर्च पेटेंट दवाओं से बहुत ही ज्यादा कम होता है।

कीमत में कितना अंतर होता है जेनरिक और पेटेंट ब्रांडेड दवाओं में-

उदाहरण के लिये ब्लड कैंसर के लिए ‘ग्लाईकेव’ ब्राण्ड की दवा की कीमत महीनेभर में लगभग 1,14,400 रूपये होगी, जबकि दूसरे ब्रांड की ‘वीनेट’ दवा का महीने भर का खर्च लगभग 11,400 से भी कम आएगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों होता है? क्या जेनरिक दवाओं की क्वालिटी पेटेंट दवाओं से बहुत कम होती है?

इनकी क्वालिटी क्या होती है-

तो हम आपको बताते हैं ऐसा नहीं है। दरअसल ये दवायें क्वालिटी में भी उतनी ही अच्छी होती हैं क्योंकि जेनेरिक दवाएं बिना किसी पेटेंट के बनाई और सरकुलेट की जाती हैं। हां, जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है लेकिन उसके मैटिरियल पर पेटेंट नहीं किया जा सकता। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से बनी जेनेरिक दवाइयों की क्वालिटी ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती। ना ही इनका असर कुछ कम होता है।

क्यों सस्ती होती है पेटेंट दवायें-

पेटेंट ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनी तय करती हैं । लेकिन जेनरिक दवाओं की कीमत सरकार तय करती है। इसलिये इन दवाओं की कीमत ब्रांडेड पेटेंट दवाओं की कीमत से कम होती है। इसके अलावा ये दवायें सीधे खरीददार तक पहुंचती हैं। इन दवाओं की पब्लिसिटी के लिए कुछ खर्चा नहीं किया जाता। इसलिए ये सस्ती होती हैं।

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