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आपकी व्यस्त जिंदगी का असर होता है आपके अजन्मे बच्चे पर भी

भागमभाग भरी लाइफस्टाइल जन्म से पहले ही आपके बच्चे की मेंटल हेल्थ को बहुत डिस्टर्ब कर रहा है। मानसिक रूप से कमजोर इन बच्चों का या तो गर्भ के दौरान ही ट्रीटमेंट किया जा रहा है या फिर इनका मानसिक स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने की वजह से इन्हें लीगल तौर पर अबॉर्शन भी कराया जा रहा है। डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मामले उन लोगों के केस में ज्यादा सामने आ रहे हैं जो बेहद बिजी और बहुत अडवांस लाइफस्टाइल जीते हैं। खासकर अधिक उम्र में शादी और फिर पैरंट्स बनने की ख्वाहिश जन्म से पहले ही बच्चे की मेंटल हेल्थ को कमजोर कर रही है। स्पेशल चाइल्ड, स्लो लर्नर चाइल्ड, सिंड्रोम के शिकार बच्चों की समाज में बढ़ती संख्या इसका बड़ा उदाहरण है। डॉक्टरों के सामने आ रहे मामलों के आधार पर हम आपको बता रहे है कि किस तरह जन्म से पहले ही आजकल बच्चों की मेंटल हेल्थ डिस्टर्ब हो रही है।

फोर्टिस अस्पताल के फेटल मेडिसन विभाग में कंसल्टेंट  बताती हैं कि 35 की उम्र के पार की गर्भवती महिलाओं के बच्चे की मेंटल हेल्थ के लिए गर्भ में ही डबल मार्कर टेस्ट कराया जाता है। हमारे यहां हर माह करीब 400 से ४५० के लगभग महिलाओं का यह टेस्ट होता है। इनमें करीब 10-14 पर्सेंट केस में शिशु की मेंटल हेल्थ डिस्टर्ब होती है। 40 पर्सेंट तक मेंटल हेल्थ डिस्टर्ब होने पर गर्भ में ही शिशु का ट्रीटमेंट किया जाता है। 50 पर्सेंट या उससे अधिक विकार होने पर 20 सप्ताह (करीब 5 महीने) की प्रेग्नेंसी को अबॉर्शन कराने की अनुमति मिल जाती है। उनका कहना है कि ऐसे केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

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क्यों डिस्टर्ब है बच्चों की मेंटल हेल्थ

कोलंबिया एशिया में नियोनाटॉलजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट  बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाएं डिप्रेशन का शिकार होती हैं। खासकर वर्किंग और हाईप्रोफाइल स्टैंडर्ड की महिलाएं। इसके अलावा महिलाओं का ऐल्कोहल लेना, स्मोकिंग, देर रात तक जगना आदि तमाम वजहों से गर्भ में पल रहे शिशु की मेंटल हेल्थ डिस्टर्ब होती है।

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