बहुत खतरनाक है आपके बच्चे की चोट

बच्चों का गिरना, गिरकर उठना और दोबारा खेलना कूदना बहुत आम है। इसी तरह बच्चे मजबूत बनते हैं। आमतौर पर माता-पिता बच्चों को लगी चोट को मामूली समझकर इग्नोर कर देते हैं। लेकिन हर बार ऐसा करना सही नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चों के प्रति एलर्ट रहें। साथ उन्हें जिस भी तरह की चोट लगी है, उसका फस्र्ट एड जरूर करें।

बिजली का झटका
खेलते हुए बिजली सॉकेट में अगर बच्चे की उंगली चली जाए तो हल्का बिजली का झटका लग सकता है। ऐसे में बच्चे को गर्म दूध पिलाएं और गर्म वातावरण दें। तेज करंट लगने पर यदि बच्चा बेहोश हो जाए तो उसे तुरन्त डाक्टर के पास ले जाएं।

गर्म दूध चाय से जलन
गर्म दूध, चाय या गर्म पानी बच्चे पर गिर जाए तो उस पर ठंडा पानी डालें। इससे ठंडक मिलेगी और इन्फेक्शन का खतरा भी कम हो जायेगा। जले हिए स्थान पर हल्दी का लेप या एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। अधिक जल जाने की स्थिति में तुरन्त डाक्टर की मदद लें।

गिरने पर
खेलते-खेलते बच्चे यदि गिर जायें और उन्हें चोट लग जाए और खून बहना बंद न हो तो पहले खून का बहना रोकने का प्रयास करें। चोट वाले स्थान को साफ हाथ से, तौलिए या रूई से कम से कम पांच मिनट तक दबा कर रखें। बीच में हाथ हटा कर न देखें। खून रूकने के पश्चात् यह देखें कि चोट कितनी गहरी है। हल्की चोट लगने पर रूई पर डेटॉल या सेवलान लगाकर चोट को साफ करें। उसके बाद बैंड-एड या एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं। बार-बार चोट लगने पर, सड़क पर गिरने या लोहे से चोट लगने पर टिटनेस साक्सायड का इंजेक्शन न लगवायें। एक बार इंजेक्शन का कोर्स पूरा लगवाने के बाद पांच वर्ष तक उसका प्रभाव रहता है। इंजेक्शन लगवाने की तिथि बच्चे के इंजेक्शन बुक में नोट कर लें ताकि बार-बार की परेशानी से बचा जा सके।